Friday, March 13, 2026
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IPL में 18 साल से बाहर पाकिस्तानी खिलाड़ी… फिर भी अबरार अहमद पर क्यों मचा बवाल? काव्या मारन के फैसले ने खड़े कर दिए नए सवाल

पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को इंग्लैंड की ‘द हंड्रेड’ लीग में भारतीय फ्रेंचाइजी से जुड़ी टीम ने खरीदा, जिसके बाद नया विवाद खड़ा हो गया। जानिए आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर लगे प्रतिबंध और काव्या मारन के फैसले पर क्यों हो रही बहस।

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क्रिकेट की दुनिया में एक नया विवाद चर्चा में आ गया है, जिसमें पाकिस्तान के युवा स्पिनर Abrar Ahmed का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। इंग्लैंड की लोकप्रिय 100 गेंदों वाली लीग The Hundred के हालिया ऑक्शन में उन्हें एक ऐसी टीम ने खरीदा है जो भारतीय फ्रेंचाइजी समूह से जुड़ी मानी जाती है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक इस फैसले पर बहस शुरू हो गई है। दरअसल, भारत की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग Indian Premier League में पिछले लगभग 18 सालों से पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी नहीं रही है। ऐसे में जब किसी भारतीय फ्रेंचाइजी से जुड़ी विदेशी टीम द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने की खबर सामने आई तो क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे। लोगों का कहना है कि आईपीएल में जिस खिलाड़ी को मौका नहीं मिलता, वह दूसरे टूर्नामेंट में भारतीय फ्रेंचाइजी से जुड़े क्लब में कैसे शामिल हो सकता है।

काव्या मारन से जुड़ी फ्रेंचाइजी के कारण चर्चा तेज

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Kavya Maran के नाम को लेकर हो रही है। काव्या मारन आईपीएल की टीम Sunrisers Hyderabad से जुड़ी प्रमुख हस्तियों में गिनी जाती हैं और उनकी कंपनी का समूह दुनिया की अलग-अलग क्रिकेट लीगों में भी निवेश कर चुका है। बताया जा रहा है कि इसी समूह से जुड़ी विदेशी टीम ने ऑक्शन में अबरार अहमद को अपने साथ जोड़ लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि जब आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जगह नहीं मिलती, तो विदेशी लीगों में भारतीय फ्रेंचाइजी उनसे क्यों जुड़ रही हैं। हालांकि कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी लीगों में टीमों का संचालन अलग नियमों के तहत होता है और वहां खिलाड़ी चयन पूरी तरह से क्रिकेट क्षमता और टीम की जरूरतों के आधार पर किया जाता है।

आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर क्यों लगा प्रतिबंध

क्रिकेट प्रेमियों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर आईपीएल में पाकिस्तान के खिलाड़ी क्यों नहीं दिखाई देते। जब 2008 में आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब पाकिस्तान के कई बड़े खिलाड़ी इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने थे। लेकिन उसी साल भारत में हुए मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध भी प्रभावित हुए और आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी लगभग खत्म हो गई। तब से लेकर अब तक आईपीएल में पाकिस्तान के किसी खिलाड़ी को खेलने का मौका नहीं मिला है। हालांकि पाकिस्तान के खिलाड़ी दुनिया की कई अन्य लीगों जैसे ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य देशों की प्रतियोगिताओं में लगातार खेलते रहे हैं। यही वजह है कि जब किसी विदेशी लीग में भारतीय फ्रेंचाइजी उनसे जुड़ती है तो यह चर्चा का विषय बन जाता है।

फैंस और विशेषज्ञों की राय अलग-अलग

अबरार अहमद के चयन के बाद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए और खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा के आधार पर मौका मिलना चाहिए। वहीं कुछ लोग इसे संवेदनशील विषय मानते हुए सवाल उठा रहे हैं कि अगर आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया जाता, तो विदेशी लीगों में भारतीय फ्रेंचाइजी का रुख अलग क्यों दिखाई देता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में कई बड़ी फ्रेंचाइजी अलग-अलग देशों की लीगों में टीमें संचालित करती हैं और वहां के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए कई बार ऐसे फैसले सामने आते हैं जो प्रशंसकों के लिए हैरानी का कारण बन जाते हैं। फिलहाल यह मामला क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

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