T20 World Cup 2026 के सुपर 8 मुकाबले में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेला गया मैच भारतीय फैंस के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। 188 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया 18.5 ओवर में सिर्फ 111 रन पर ऑलआउट हो गई। बल्लेबाजी क्रम एक के बाद एक बिखरता गया और कोई भी खिलाड़ी लंबे समय तक क्रीज पर टिक नहीं पाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में उतरी टीम से उम्मीदें काफी थीं, लेकिन शुरुआत से ही दबाव साफ नजर आया।
पावरप्ले में विकेट गिरने के बाद भारतीय बल्लेबाज संभलने की बजाय तेजी से रन बनाने की कोशिश में जोखिम भरे शॉट खेलते रहे। पिच पर गेंद रुककर आ रही थी, जिससे टाइमिंग करना आसान नहीं था। इसके बावजूद आक्रामक रवैया भारी पड़ गया। नतीजा यह रहा कि बड़े लक्ष्य का दबाव भारतीय बल्लेबाजों पर साफ दिखा और पूरी टीम 20 ओवर भी नहीं खेल पाई।
यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं मानी जा रही, बल्कि टूर्नामेंट के अहम दौर में आई ऐसी शिकस्त है जिसने टीम संयोजन और रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिषेक शर्मा की पारी पर उठे सवाल
इस मैच में सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की पारी को लेकर हुई। उन्होंने 15 रन बनाए, जिसमें दो चौके और एक छक्का शामिल था, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास की कमी साफ नजर आई। शुरुआत में एक-दो अच्छे शॉट जरूर दिखे, पर जैसे ही गेंदबाजों ने लाइन बदली, वह असहज नजर आए।
पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बात करते हुए कहा कि अभिषेक के खेल में फिलहाल वह फ्लुएंसी नहीं दिख रही जो बड़े मुकाबलों में जरूरी होती है। उन्होंने समझाया कि नेट्स और मैच की परिस्थिति अलग होती है। नेट्स में खिलाड़ी जानता है कि अगली गेंद फिर मिलेगी, लेकिन मैच में एक गलती ही अंत हो सकती है। यही दबाव कई बार हाथों की मूवमेंट को रोक देता है।
गावस्कर ने खास तौर पर साउथ अफ्रीकी तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा की रणनीति की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रबाडा ने छक्का खाने के बाद भी अपनी लाइन नहीं बदली और लगातार पैड्स पर गेंदबाजी करते रहे। इससे अभिषेक को ऑफ साइड में जगह नहीं मिली, जहां वह आमतौर पर स्ट्रोक खेलना पसंद करते हैं। इस तरह की अनुशासित गेंदबाजी ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
भारतीय बल्लेबाजों का खराब शॉट सिलेक्शन बना बड़ा कारण
गावस्कर ने सिर्फ अभिषेक ही नहीं, बल्कि पूरी भारतीय बल्लेबाजी की आलोचना की। उनके मुताबिक इस पिच पर धैर्य की जरूरत थी, लेकिन भारतीय बल्लेबाज जल्दबाजी में बड़े शॉट लगाने की कोशिश करते रहे। उन्होंने कहा कि जब गेंद आसानी से बैट पर नहीं आ रही हो, तब विकेट बचाकर साझेदारी बनाना ज्यादा जरूरी होता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस जैसे साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों ने परिस्थितियों को समझते हुए खेला। उन्होंने शुरुआत में जोखिम नहीं लिया, पहले खुद को सेट किया और फिर रन गति बढ़ाई। इसी वजह से साउथ अफ्रीका प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंच सका।
भारतीय बल्लेबाजों के मामले में स्थिति उलट रही। मिडिल ऑर्डर भी टिक नहीं पाया और लगातार विकेट गिरते रहे। बड़े लक्ष्य का दबाव जरूर था, लेकिन गावस्कर का मानना है कि समझदारी से खेलते तो मुकाबला आखिरी ओवरों तक ले जाया जा सकता था। इस हार ने यह साफ कर दिया कि सिर्फ आक्रामक खेल ही काफी नहीं, हालात के मुताबिक रणनीति बदलना भी उतना ही जरूरी है।
क्या बदलाव की जरूरत? आगे की राह पर नजर
इस हार के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या टीम प्रबंधन बल्लेबाजी क्रम या रणनीति में बदलाव करेगा। अभिषेक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए यह सीखने का बड़ा मौका है। बड़े टूर्नामेंट में दबाव को संभालना और परिस्थितियों के हिसाब से खेलना ही असली परीक्षा होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीम इंडिया को पावरप्ले में स्थिर शुरुआत पर ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर शुरुआती विकेट जल्दी गिरते हैं, तो मिडिल ऑर्डर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही, बल्लेबाजों को यह समझना होगा कि हर पिच पर एक ही तरह की बल्लेबाजी सफल नहीं होती।
T20 World Cup 2026 अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सुपर 8 में मिली यह हार टीम के लिए चेतावनी जरूर है। सुनील गावस्कर की टिप्पणी केवल आलोचना नहीं, बल्कि सुधार का संकेत भी है। अब देखना यह होगा कि भारतीय टीम इस हार से क्या सीख लेती है और अगले मुकाबलों में किस रणनीति के साथ मैदान पर उतरती है।
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