भारतीय क्रिकेट इस समय एक अनोखे दौर से गुजर रहा है, जहां सुर्खियों में रोहित शर्मा, विराट कोहली या जसप्रीत बुमराह नहीं, बल्कि महज 14 साल का एक किशोर बल्लेबाज है। वैभव सूर्यवंशी इस वक्त भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले भारतीय क्रिकेटरों में शामिल हो चुके हैं। साल 2025 में गूगल सर्च ट्रेंड्स में वैभव ने कई स्थापित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है, जो इस बात का साफ संकेत है कि उनकी बल्लेबाजी ने क्रिकेट प्रेमियों पर गहरी छाप छोड़ी है।
घरेलू क्रिकेट से लेकर जूनियर लेवल तक वैभव सूर्यवंशी ने लगातार ऐसे प्रदर्शन किए हैं, जिसने चयनकर्ताओं और पूर्व क्रिकेटरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्रिकेट फैंस के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है—जब इतना कम उम्र का खिलाड़ी इतना परिपक्व और विस्फोटक खेल दिखा सकता है, तो उसे टीम इंडिया में मौका क्यों नहीं मिल रहा? यही सवाल अब राजनीति के गलियारों तक भी पहुंच चुका है।
विजय हजारे ट्रॉफी में ऐतिहासिक पारी
विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के पहले ही मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा तूफानी प्रदर्शन किया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया। बिहार की ओर से खेलते हुए वैभव ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ सिर्फ 84 गेंदों में 190 रन ठोक डाले। इस दौरान उन्होंने 16 चौके और 15 लंबे छक्के लगाए, जिससे मैदान के चारों ओर बैठे दर्शक झूम उठे।
यह पारी सिर्फ रनों के आंकड़े तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें वैभव की तकनीक, आत्मविश्वास और मैच पढ़ने की क्षमता साफ नजर आई। इतनी कम उम्र में बड़े शॉट्स खेलने के साथ-साथ स्ट्राइक रोटेशन और गेंदबाजों पर दबाव बनाना, उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है। इस एक पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी का नाम हर क्रिकेट चर्चा का केंद्र बन गया और सोशल मीडिया पर उनकी तुलना भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से होने लगी।
शशि थरूर का सवाल, BCCI और चयनकर्ताओं पर दबाव
वैभव सूर्यवंशी की इस धमाकेदार पारी के बाद कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर भी खुद को टिप्पणी करने से रोक नहीं पाए। थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सीधे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से सवाल पूछ डाला। उन्होंने लिखा कि पिछली बार जब किसी 14 साल के खिलाड़ी ने क्रिकेट में ऐसी असाधारण प्रतिभा दिखाई थी, तो वह सचिन तेंदुलकर थे, और हम जानते हैं कि आगे चलकर उन्होंने इतिहास रच दिया।
शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में बीसीसीआई, चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर, हेड कोच गौतम गंभीर और सचिन तेंदुलकर को भी टैग किया। उनका सवाल सीधा था—“आप किसका इंतजार कर रहे हैं?” इस बयान के बाद क्रिकेट और राजनीति दोनों जगत में हलचल तेज हो गई। कई पूर्व खिलाड़ी और फैंस भी खुलकर वैभव के समर्थन में सामने आ गए और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगे।
सचिन से तुलना, लेकिन भविष्य को लेकर बड़ी बहस
वैभव सूर्यवंशी की तुलना सचिन तेंदुलकर से होना अपने आप में बड़ी बात है। सचिन ने 14 साल की उम्र में ही मुंबई के लिए शतक जड़ दिया था और 16 साल 205 दिन की उम्र में टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था। आज वैभव भी उसी उम्र में घरेलू क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड बना रहे हैं, जो बहुत कम खिलाड़ियों ने बनाए हैं। हालांकि, कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव डालना सही नहीं होगा।
दूसरी ओर, फैंस और कई दिग्गजों का तर्क है कि अगर प्रतिभा तैयार है और खिलाड़ी मानसिक रूप से मजबूत है, तो उम्र सिर्फ एक नंबर होनी चाहिए। वैभव सूर्यवंशी का नाम अब सिर्फ एक उभरते खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य के भारतीय क्रिकेट की उम्मीद के रूप में लिया जाने लगा है। आने वाले समय में बीसीसीआई क्या फैसला लेती है, इस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। इतना तय है कि वैभव सूर्यवंशी ने 14 साल की उम्र में ही भारतीय क्रिकेट को नई बहस और नई उम्मीद दे दी है।
