भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की सबसे बड़ी और चर्चित फुटबॉल लीग इंडियन सुपर लीग (ISL) को लेकर अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है। साल की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ISL का अगला सीजन होगा भी या नहीं। इस असमंजस की स्थिति ने न सिर्फ खिलाड़ियों को, बल्कि कोचिंग स्टाफ, क्लब प्रबंधन और लाखों फुटबॉल फैंस को भी चिंता में डाल दिया है। आमतौर पर जनवरी के महीने में भारतीय फुटबॉल प्रेमी टीवी स्क्रीन पर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते हैं, लेकिन इस बार मैदान सूने हैं। इसी हालात को देखते हुए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई फुटबॉल खिलाड़ियों ने वैश्विक संस्था FIFA से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि भारत के फ्रैंचाइजी आधारित इस टूर्नामेंट को बचाया जा सके।
सुनील छेत्री और गुरप्रीत की पीड़ा, खिलाड़ियों का टूटा मनोबल
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और देश के सबसे बड़े फुटबॉल आइकन सुनील छेत्री ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी और दुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि यह जनवरी का महीना है और इस समय खिलाड़ियों को ISL में खेलते हुए दर्शकों के सामने होना चाहिए था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। छेत्री ने साफ शब्दों में कहा कि खिलाड़ियों, स्टाफ और फैंस – तीनों को यह जानने का हक है कि लीग का भविष्य क्या है। वहीं, राष्ट्रीय टीम के अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि इस वक्त खिलाड़ी मैदान पर खेलने की तैयारी के बजाय भय, हताशा और असमंजस से जूझ रहे हैं। डिफेंडर संदेश झिंगन भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने FIFA से गुहार लगाई है। इन दिग्गजों की आवाज़ ने यह साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ एक लीग का नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल के पूरे ढांचे का है।
क्लबों की शर्तें और AIFF की जिम्मेदारी, पत्र से खुला राज
इस संकट के बीच ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को ISL की लगभग सभी फ्रैंचाइजी की ओर से एक अहम पत्र मिला है। इस पत्र में क्लबों ने साफ किया है कि वे लीग में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी भागीदारी कुछ अहम शर्तों पर निर्भर करेगी। क्लबों का कहना है कि AIFF को वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर ठोस आश्वासन देने होंगे। फ्रैंचाइजियों ने यह भी मांग रखी है कि टूर्नामेंट में भागीदारी के लिए कोई लीग प्रशासनिक शुल्क न लिया जाए। इसके अलावा, अगर सीजन छोटा होता है या आयोजन में देरी के कारण अतिरिक्त खर्च बढ़ता है, तो उसकी पूरी वित्तीय जिम्मेदारी AIFF को लेनी चाहिए। क्लबों का मानना है कि मौजूदा हालात में बिना स्पष्ट योजना और आर्थिक सुरक्षा के लीग में उतरना जोखिम भरा होगा, जिसका सीधा असर खिलाड़ियों और स्टाफ पर पड़ेगा।
2013 से 2025 तक का सफर और अब भविष्य पर सवाल
इंडियन सुपर लीग की शुरुआत साल 2013 में हुई थी और बहुत कम समय में यह भारत की सबसे लोकप्रिय फुटबॉल लीग बन गई। विदेशी सितारों की मौजूदगी, बड़े स्टेडियम और टीवी कवरेज ने ISL को नई पहचान दिलाई। 2024-25 सीजन तक लीग ने भारतीय फुटबॉल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, लेकिन अब इसका भविष्य धुंध में नजर आ रहा है। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो इसका असर सिर्फ ISL तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवा खिलाड़ियों के करियर, राष्ट्रीय टीम की तैयारियों और भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है कि दिग्गज खिलाड़ी खुलकर सामने आए हैं और FIFA से मदद की अपील कर रहे हैं। अब सबकी नजरें AIFF और FIFA पर टिकी हैं कि क्या भारतीय फुटबॉल को इस संकट से बाहर निकालने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या फिर ISL का सुनहरा दौर इतिहास बनकर रह जाएगा।
Read more-शाहरुख खान पर तीखे आरोप, सोशल मीडिया पर उबाल… मुस्तफिजुर रहमान विवाद ने क्यों पकड़ा तूल?
