अलीगढ़ का एक साधारण सा घर, जहां कुछ महीनों बाद शहनाइयों की गूंज सुनाई देने वाली थी, आज वहां खामोशी पसरी है। भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे रिंकू सिंह के जीवन में यह समय सबसे कठिन साबित हुआ। जिन सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, वही सपने अब उन्हें टीस दे रहे हैं। रिंकू के पिता खानचंद सिंह का हाल ही में फोर्थ स्टेज लीवर कैंसर के कारण निधन हो गया। वह ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर जीवन की अंतिम लड़ाई लड़ रहे थे।
रिंकू जब अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शेड्यूल के बीच अचानक सब कुछ छोड़कर घर लौटे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिस पिता ने बेटे के हाथ में पहली बार बल्ला थमाया, वही पिता बेटे को सेहरा बांधते देखने की आखिरी ख्वाहिश अधूरी छोड़ गए।
संघर्ष, त्याग और एक पिता की अधूरी इच्छा
रिंकू सिंह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे रिंकू ने गरीबी, सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। उनके पिता खानचंद सिंह अलीगढ़ में सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। दिनभर की थकान के बावजूद वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कभी समझौता नहीं करते थे।
उन्होंने रिंकू को छोटे-मोटे काम करने की सलाह जरूर दी, लेकिन बेटे के जुनून को कभी कुचला नहीं। रिंकू की हर जीत में पिता की मेहनत और त्याग शामिल रहा। लेकिन जिस पल का इंतजार हर पिता करता है—बेटे की शादी—वह सपना अधूरा रह गया। खानचंद सिंह चाहते थे कि वह अपने बेटे को घोड़ी चढ़ते देखें, घर में बहू के आने से पहले ही उनकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।
टली हुई शादी और जिंदगी भर का मलाल
रिंकू सिंह की सगाई समाजवादी पार्टी की मछलीशहर से सांसद Priya Saroj के साथ जून 2025 में हुई थी। यह सगाई लखनऊ में बेहद सादगी और पारिवारिक माहौल में संपन्न हुई, जिसमें राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं। दोनों परिवारों ने शादी की तारीख नवंबर 2025 तय की थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतिबद्धताओं और लगातार मैचों के कारण रिंकू ने शादी को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। यही वह फैसला था, जो आज उनके जीवन का सबसे बड़ा अफसोस बन गया है। चर्चा थी कि शादी जून 2026 में होगी, लेकिन उससे पहले ही पिता दुनिया छोड़ गए। रिंकू के करीबियों का कहना है कि उन्हें इस बात का गहरा दुख रहेगा कि अगर उन्होंने करियर से कुछ समय निकालकर पहले शादी कर ली होती, तो उनके पिता वह खुशी देख पाते, जिसके लिए उन्होंने पूरी जिंदगी संघर्ष किया।
सफलता के शिखर पर अकेलापन
आज रिंकू सिंह देश के लिए मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं, करोड़ों दिलों की धड़कन हैं। लेकिन इस सफलता के शिखर पर खड़े होकर भी उनके भीतर एक खालीपन है। पिता का आशीर्वाद, जो हर बड़ी उपलब्धि पर उनका संबल बनता था, अब सिर्फ यादों में रह गया है।
करीबी लोग बताते हैं कि रिंकू अपने पिता को बहुत मानते थे और हर फैसले में उनसे सलाह लेते थे। यह घटना न सिर्फ एक खिलाड़ी की निजी पीड़ा है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए एक सीख भी है, जो करियर और रिश्तों के बीच संतुलन तलाश रहे हैं। रिंकू की यह कहानी बताती है कि सफलता चाहे जितनी बड़ी क्यों न हो, अपनों की मुस्कान के बिना वह अधूरी ही रहती है।
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