Thursday, February 26, 2026
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शादी में वर्दी की मर्यादा क्यों भूले दारोगा? मंच पर ठुमके, नोटों की बारिश और फिर… कैमरे में कैद हुआ पूरा सच!

बक्सर के बगेन गोला थाना में तैनात दारोगा मनीष कुमार का शादी समारोह में वर्दी में डांस और नोट उड़ाने का वीडियो वायरल। विभाग ने किया निलंबित, जांच जारी। पढ़ें पूरी खबर।

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बिहार के बक्सर जिले से सामने आया एक वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बगेन गोला थाना में तैनात दारोगा मनीष कुमार का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह शादी समारोह के दौरान वर्दी में मंच पर चढ़कर डांसर के साथ नाचते और नोट उड़ाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और संबंधित दारोगा को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्दी में सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस तरह का व्यवहार उचित है?

मंच पर चढ़े दारोगा, मोबाइल कैमरे ने खोली पूरी कहानी

जानकारी के अनुसार, बक्सर जिले के एक गांव में शादी समारोह के दौरान ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम चल रहा था। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण और मेहमान मौजूद थे। इसी बीच बगेन गोला थाना में तैनात दारोगा मनीष कुमार भी वहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे वर्दी में ही कार्यक्रम में शामिल हुए।

कुछ देर बाद माहौल में जोश बढ़ा और दारोगा मंच पर चढ़ गए। वीडियो में देखा जा सकता है कि वे डांसर के साथ ठुमके लगा रहे हैं। इतना ही नहीं, वे डांसर पर नोट भी उड़ा रहे हैं। वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। लोगों ने इसे पुलिस की वर्दी की गरिमा से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों का कहना है कि पुलिस अधिकारी को इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम में संयमित आचरण रखना चाहिए।

वीडियो वायरल होते ही विभाग सख्त

वीडियो सामने आने के बाद जिला पुलिस प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई कि वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति वास्तव में दारोगा मनीष कुमार हैं, जो उस समय बगेन गोला थाना में तैनात थे। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्दी केवल ड्रेस नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक है। सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को वर्दी में इस प्रकार के कार्यक्रम में अनुचित व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं, जिसमें यह भी जांचा जाएगा कि कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी निजी थी या किसी आधिकारिक कारण से। यदि जांच में अन्य नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

सोशल मीडिया पर बहस, छवि और जिम्मेदारी पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे निजी कार्यक्रम का हिस्सा बताकर हल्का मामला मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे गंभीर अनुशासनहीनता बता रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग में कार्यरत अधिकारी को हर परिस्थिति में अपनी छवि और जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के डिजिटल दौर में हर सार्वजनिक गतिविधि तुरंत रिकॉर्ड हो सकती है और वायरल हो सकती है। ऐसे में सरकारी पद पर बैठे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। वर्दी जनता के विश्वास का प्रतीक होती है। इस तरह की घटनाएं न केवल व्यक्ति की छवि, बल्कि पूरे विभाग की साख पर असर डालती हैं। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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