Thursday, February 19, 2026
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मुस्लिम-ईसाई भी बन सकते हैं RSS के स्वयंसेवक, लेकिन शर्त ये है… मोहन भागवत का बड़ा खुलासा

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RSS Chief Mohan Bhagwat Statement के अनुसार, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस किसी व्यक्ति या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह संगठन उन सभी लोगों के लिए खुला है जो भारत माता को अपनी मातृभूमि और हिंदू संस्कृति को अपनी विरासत मानते हैं।

भागवत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चुनावी राजनीति में हिस्सा नहीं लेता और न ही किसी राजनीतिक दल का अंग है। उन्होंने कहा कि आरएसएस नीतियों का समर्थन करता है, न कि किसी पार्टी का।

“जो भारत को माता कहता है, वह हिंदू संस्कृति का हिस्सा है”

मोहन भागवत ने कहा “आरएसएस के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। जो व्यक्ति भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और उसके प्रति निष्ठावान है, वह आरएसएस में आ सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या भाषा का क्यों न हो।”

मोहन भागवत के मुताबिक, संघ किसी धर्म विशेष का संगठन नहीं बल्कि एक राष्ट्र निर्माण आंदोलन है। उन्होंने कहा कि “भारत में रहने वाला हर व्यक्ति, जो इस भूमि को माता मानता है, वह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।”

मुस्लिम और ईसाई भी बन सकते हैं स्वयंसेवक

कार्यक्रम में जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या मुस्लिम या ईसाई व्यक्ति आरएसएस में शामिल हो सकता है? तो भागवत ने कहा “क्यों नहीं? अगर वह भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और यहां की संस्कृति का सम्मान करता है, तो वह भी स्वयंसेवक बन सकता है।”उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य किसी को बदलना नहीं बल्कि जोड़ना है। हर व्यक्ति के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना ही आरएसएस का मूल लक्ष्य है।

“राजनीति से हमारा कोई लेना-देना नहीं”

RSS Chief Mohan Bhagwat Statement में उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस का किसी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा — “हम चुनाव नहीं लड़ते, लेकिन राष्ट्रहित में बनने वाली नीतियों का समर्थन करते हैं। राजनीति हमारे लिए साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का एक माध्यम है।”भागवत ने बताया कि संघ ने कभी किसी पार्टी का प्रचार नहीं किया, बल्कि केवल उन नीतियों का समर्थन किया जो राष्ट्रहित में हों।

“हिंदुत्व कोई धार्मिक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है”

मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि “हिंदुत्व” को धर्म के रूप में नहीं बल्कि जीवनशैली के रूप में समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा “हिंदुत्व किसी मज़हब का विरोध नहीं करता। यह तो वह जीवनशैली है जिसमें मानवता, सेवा और सत्य की भावना बसती है। कोई भी व्यक्ति जो इन मूल्यों को मानता है, वह हिंदू संस्कृति का हिस्सा है।” RSS Chief Mohan Bhagwat Statement में उन्होंने बताया कि संघ केवल पूजा पद्धति पर नहीं, बल्कि मानवता और एकता पर विश्वास करता है।

“हमारी संस्कृति जोड़ने की है, तोड़ने की नहीं”

मोहन भागवत ने कहा कि संघ हमेशा समाज को जोड़ने की दिशा में काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति समावेशी है, जो हर पंथ और हर व्यक्ति का सम्मान करती है। “हम सबको जोड़ने वाले हैं, अलग करने वाले नहीं। संघ यह मानता है कि सभी धर्मों में अच्छाई है और सबका लक्ष्य मानव कल्याण ही है।” RSS Chief Mohan Bhagwat Statement में उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने भारत की जीवन पद्धति एक उदाहरण बन सकती है।

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