बिहार विधानसभा का माहौल सोमवार को खास बन गया, जब पहली बार विधायक बनीं मशहूर लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने सदन में प्रवेश किया। अलीनगर सीट से जीतकर पहुंचीं मैथिली ठाकुर ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सबसे आगे रखते हुए पीली साड़ी, सिर पर पारंपरिक पाग और माथे पर सादा तिलक के साथ विधायक पद की शपथ ली। उनकी शपथ की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने इसे अपनी मातृभाषा मैथिली में लिया। जैसे ही उन्होंने शपथ पढ़ना शुरू किया, सदन में मौजूद कई सदस्य और दर्शक दीर्घा में बैठे लोग उनकी ओर ध्यान केंद्रित करने लगे, क्योंकि यह क्षण केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया था।
उनकी यह सादगी भरी परंपरागत झलक तुरंत सोशल मीडिया पर फैल गई और कुछ ही घंटों में वीडियो लाखों बार देखा जाने लगा। लोग इसे मिथिला की अस्मिता और युवाओं के उभार के रूप में देख रहे हैं।
मिथिला की संस्कृति का गर्व—पाग और पीली साड़ी बना आकर्षण
शपथ ग्रहण के दौरान मैथिली ठाकुर जिस पाग को धारण किए थीं, वह मिथिलांचल में सम्मान, प्रतिष्ठा और गौरव का प्रतीक माना जाता है। पाग पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं द्वारा विशेष मौकों पर पहना जाने वाला पारंपरिक सिरोपटा है, जो सदियों से मिथिला की पहचान का अहम हिस्सा रहा है। राजनीति में कदम रखने के बाद भी मैथिली ठाकुर ने अपने इस सांस्कृतिक जुड़ाव को नहीं छोड़ा।
भारत माता की जय 🇮🇳🙏 pic.twitter.com/lLzzld44d3
— Maithili Thakur (@maithilithakur) December 1, 2025
पीली साड़ी का चयन भी उनकी तरफ से एक सांकेतिक संदेश था। मिथिला में पीला रंग शुभ, पवित्रता और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। इस परिधान ने विधानसभा में उनकी उपस्थिति को और भी खास बना दिया। कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनकी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे क्षण भारतीय लोकतंत्र को और अधिक विविधतापूर्ण व सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।
सदन में मौजूद लोग न केवल उनके परिधान की चर्चा कर रहे थे, बल्कि इस बात से भी प्रभावित थे कि उन्होंने अपनी मातृभाषा में शपथ लेकर नव-निर्वाचित विधायकों के बीच एक अलग पहचान बनाई है।
पाग विवाद के बीच शपथ समारोह ने बढ़ाया महत्व
हाल के चुनावों के दौरान पाग को लेकर एक बड़ा विवाद भी सामने आया था। चुनाव प्रचार के दौरान मैथिली ठाकुर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह पाग पहनकर मखाना खाती दिख रही थीं। यह वीडियो कई लोगों को पसंद आया, लेकिन समाज के एक हिस्से ने इसे सांस्कृतिक प्रतीकों के अनुचित उपयोग के रूप में देखा और सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई।
विवाद यहीं नहीं रुका। मैथिली ठाकुर के प्रचार में शामिल उत्तर प्रदेश की एक महिला विधायक के बयान को लेकर भी बड़ा हंगामा हुआ था, जिसमें कथित तौर पर पाग का अपमान करने का आरोप लगा। इस घटना ने मिथिला समाज में भावनाएं भड़का दीं और कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई।
इसी पृष्ठभूमि में मैथिली ठाकुर का पाग पहनकर शपथ ग्रहण करना एक संदेश की तरह देखा जा रहा है—कि वह अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान रखती हैं और इसे राजनीति के मंच पर भी गर्व के साथ आगे बढ़ाना चाहती हैं। कई सामाजिक संगठनों ने इसे मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने वाला कदम बताया है।
शपथ के बाद विकास और युवाओं को लेकर बड़ा बयान
शपथ ग्रहण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के विकास, शिक्षा और युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में आकर उनका उद्देश्य सिर्फ जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने इलाक़े के लोगों के लिए काम करना है।
मैथिली ठाकुर ने सांस्कृतिक मुद्दों पर भी कहा कि वह मिथिला की परंपरा, भाषा और लोककलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर नया स्थान दिलाने की दिशा में काम करेंगी। उनके अनुसार, पाग केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि वह मिथिला की आत्मा, सम्मान और अस्मिता का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े विवादों को समझने और सम्मान देने की ज़रूरत है।
युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय मैथिली ठाकुर के राजनीति में आने को लोग एक नए दौर की शुरुआत मान रहे हैं, जहां युवा नेता न सिर्फ विकास की बात करेंगे, बल्कि अपनी भाषा और परंपरा को भी खुलकर अपनाएंगे। उनके शपथ ग्रहण के वीडियो पर मिल रहे सकारात्मक प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि जनता उनके इस कदम को सराह रही है और उन्हें एक उम्मीद की नजर से देख रही है।
