पटना में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चौकीदारों और दफादारों पर हुए लाठीचार्ज ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। इस घटना पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गांवों की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मियों की आवाज को बल प्रयोग से दबाना बेहद दुखद और चिंताजनक है। चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को रखने वाले कर्मचारियों पर इस तरह की कार्रवाई किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस बयान के बाद यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।
डिप्टी सीएम और गृहमंत्री से मुलाकात का फैसला
चिराग पासवान ने घोषणा की कि उनकी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री Samrat Choudhary से मुलाकात करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल सांसद अरुण भारती के नेतृत्व में जाएगा और चौकीदार-दफादार कर्मियों की समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में मानदेय बढ़ाने, सेवा शर्तों में सुधार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शामिल होगी। चिराग ने यह भी कहा कि वह स्वयं मुख्यमंत्री Nitish Kumar से मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मियों की आजीविका और सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। पार्टी का कहना है कि गांवों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में इन कर्मियों की अहम भूमिका होती है, इसलिए उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार जरूरी है।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक 23 फरवरी को बिहार पुलिस के चौकीदारों ने पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया था। उनकी मुख्य मांग मानदेय में बढ़ोतरी और सेवा संबंधी सुधारों को लेकर थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों द्वारा बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। इस घटना ने राज्य में चौकीदार-दफादारों की स्थिति और उनकी मांगों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सम्मान और सामाजिक सुरक्षा पर जोर, आगे क्या होगा?
चिराग पासवान ने अपने बयान में कहा कि गांवों की सुरक्षा करने वालों का सम्मान और भविष्य सुरक्षित रखना सरकार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर वर्षों से सेवा दे रहे परिवारों की गरिमा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाती है। क्या चौकीदार-दफादारों की मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा या मामला और तूल पकड़ेगा? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण कर्मियों और उनके परिवारों का जुड़ाव है। फिलहाल, प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित मुलाकात और मुख्यमंत्री से संभावित बातचीत के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
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