जनवरी 2026 में प्रयागराज के माघ मेले में एक घटना ने सबका ध्यान खींचा। खबर मिली कि कुछ युवाओं की शिखा (ब्राह्मणों की पारंपरिक चोटी) खींची गई और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान के समय प्रवेश नहीं दिया गया। यह घटना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली मानी गई। स्थानीय लोगों और भक्तों ने इसे धार्मिक अपमान और परंपरा का उल्लंघन बताया। इस घटना ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर तेज बहस शुरू कर दी।
स्थानीय भक्तों का कहना था कि माघ मेला हमेशा से धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र रहा है। लेकिन इस बार हुई घटना ने लोगों को चिंता में डाल दिया। समाज के विभिन्न वर्गों ने इसे गंभीर विषय माना। इस विवाद ने प्रशासन और पुलिस पर भी सवाल खड़े कर दिए।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बयान और कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस घटना पर कहा कि किसी ब्राह्मण की शिखा को छूना या खींचना गंभीर पाप है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के कृत्यों के लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने इसे हिंदू परंपरा और धर्म का अपमान बताया।
इसके बाद ब्रजेश पाठक ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 100 से ज्यादा बटुक ब्राह्मणों को बुलाया और उन्हें सम्मानित किया। सभी का तिलक किया गया और पुष्प माला पहनाकर आशीर्वाद लिया गया। इस कदम को राजनीतिक और धार्मिक संदेश दोनों के रूप में देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रजेश पाठक ने अपने बयान और सम्मान से यह दिखाने की कोशिश की कि वह धार्मिक परंपराओं के प्रति संवेदनशील हैं और समाज में सम्मान बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन
इस विवाद में सबसे अहम मोड़ तब आया जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सार्वजनिक रूप से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान का समर्थन किया। स्वामी जी ने कहा कि धर्म में पाप और पुण्य की समझ जरूरी है और किसी नेता द्वारा इसे समझना और बयान देना सकारात्मक कदम है।
स्वामी जी ने यह भी कहा कि पाप का फल पापी को ही मिलता है और ब्रजेश पाठक की टिप्पणी धार्मिक दृष्टिकोण से सही है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि धार्मिक मामलों में संवेदनशील रहें और परंपराओं का सम्मान करें। उनके समर्थन ने इस विवाद को और बड़ा बना दिया। कई धार्मिक संगठन और साधु-संतों ने भी डिप्टी सीएम के बयान को सही ठहराया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
ब्राह्मण शिखा विवाद और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन के बाद राजनीति में हलचल बढ़ गई। समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव ने डिप्टी सीएम के बयान पर तंज कसा और इसे सियासी मुद्दा बताया। भाजपा के अंदर भी अलग-अलग रुख दिखाई दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता और प्रशासन हर स्थिति में निष्पक्ष रहेगा। सामाजिक संगठनों और ब्राह्मण समुदाय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने ब्रजेश पाठक के बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक चाल माना। सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने अपने-अपने विचार रखे।
इस पूरे विवाद ने दिखाया कि धार्मिक और राजनीतिक मामलों में संतुलन बनाए रखना कितना मुश्किल है। ब्रजेश पाठक का बयान, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन और प्रशासन की भूमिका सभी ने इस मुद्दे को चर्चा का केंद्र बना दिया।
