Tuesday, March 3, 2026
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“अगर जहाज निकला तो जला देंगे!” ईरान की सख्ती से दुनिया में तेल संकट का डर, आसमान छुएगी कीमतें

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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच Iran ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई IRGC ने ऐलान किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा। साथ ही सख्त शब्दों में चेतावनी दी गई है कि अगर कोई जहाज वहां से निकलने की कोशिश करेगा तो उसे आग के हवाले कर दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जंग चौथे दिन भी जारी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

ईरानी मीडिया के मुताबिक IRGC के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा कि यह फैसला देश की सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नौसेना पूरी तरह तैयार हैं। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार में चिंता की लहर दौड़ा दी है। दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं और कई जहाजों ने अपनी दिशा बदलने पर विचार शुरू कर दिया है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और यहीं से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल समुद्री रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और खुद ईरान से निकलने वाले तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से होकर एशियाई बाजारों, खासकर चीन, जापान और भारत तक पहुंचते हैं।

सबसे संकरे हिस्से में यह जलडमरूमध्य करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन शिपिंग लेन उससे भी कम चौड़ी है। यही वजह है कि यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ता है। यदि ईरान अपने फैसले पर अडिग रहता है और जहाजों की आवाजाही रोक देता है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ ही दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकते हैं, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ेगा।

संघर्ष की पृष्ठभूमि: कैसे बढ़ा यह संकट?

मौजूदा संकट की जड़ें हाल ही में हुई संयुक्त सैन्य कार्रवाई से जुड़ी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार US और Israel की संयुक्त स्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei** की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव विस्फोटक स्तर तक पहुंच गया। ईरान ने इसे सीधी जंग की घोषणा मानते हुए बदले की कार्रवाई शुरू कर दी।

ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के कुछ इलाकों में भी हमलों की खबरें सामने आईं। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान का पूरा ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इतना साफ है कि संघर्ष अब सीमित नहीं रहा और क्षेत्रीय स्तर पर फैल चुका है।

विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज को बंद करने की धमकी ईरान का रणनीतिक दांव है। इससे वह वैश्विक शक्तियों पर दबाव बनाना चाहता है, क्योंकि तेल सप्लाई बाधित होने से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ता है।

तेल बाजार में हलचल और आगे की राह

तेल बाजार पहले ही अनिश्चितता से जूझ रहा था, और अब होर्मुज संकट ने आग में घी का काम किया है। जैसे ही ईरान की चेतावनी सामने आई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। निवेशकों को डर है कि अगर समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा, तो सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी।

कुछ देशों ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेने की कोशिश की है। सऊदी अरब और यूएई के पास पाइपलाइन के जरिए कुछ मात्रा में तेल को सीधे रेड सी या अन्य बंदरगाहों तक पहुंचाने की सुविधा है, लेकिन यह कुल सप्लाई का छोटा हिस्सा ही कवर कर सकती है। अधिकांश तेल के लिए होर्मुज ही मुख्य मार्ग है। अमेरिकी ऊर्जा एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार यहां से गुजरने वाले बड़े हिस्से के लिए कोई आसान विकल्प उपलब्ध नहीं है।

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