Saturday, December 13, 2025
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गुटखा खाकर धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने पर प्रेमानंद महाराज का बड़ा बयान, बोले- “ये भक्ति नहीं, ये अपमान है”

वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद महाराज ने गुटखा खाकर धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने वालों को दी चेतावनी, बोले- भक्ति का अर्थ शुद्धता और श्रद्धा है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संत श्री प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने सवाल किया कि क्या गुटखा या तंबाकू खाकर कोई व्यक्ति धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकता है? इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने बड़ी ही सहजता से, लेकिन गहराई भरे शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “भक्ति का मतलब सिर्फ पाठ या नामजप नहीं होता, भक्ति का अर्थ है — शरीर, मन और वाणी की शुद्धता।”

महाराज ने आगे कहा कि जब तक व्यक्ति अपने शरीर और मन को शुद्ध नहीं रखता, तब तक वह ईश्वर की सच्ची आराधना नहीं कर सकता। गुटखा, तंबाकू या किसी भी नशे का सेवन भक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि भक्ति में बाधा है।

“भक्ति का मतलब दिखावा नहीं, भीतर की पवित्रता है”

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आजकल बहुत से लोग भक्ति को केवल एक दिखावे का माध्यम बना रहे हैं। कोई फोटो खिंचवाकर पाठ करता है, तो कोई सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर ‘धार्मिक’ बनता है। लेकिन ईश्वर को कैमरे की नहीं, भाव की जरूरत है। उन्होंने कहा, “भगवान को तुम्हारे शब्द नहीं चाहिए, तुम्हारा हृदय चाहिए। अगर मन में पवित्रता नहीं है, तो भक्ति के सारे कर्म व्यर्थ हैं।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि गुटखा या पान जैसी चीज़ें शरीर को अशुद्ध करती हैं, और जब शरीर ही अशुद्ध है तो ईश्वर का नाम लेने का अर्थ खो जाता है। प्रेमानंद महाराज ने कहा, “जो व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करने से पहले अपने जूते बाहर निकाल देता है, उसे यह भी समझना चाहिए कि मुख और मन को भी स्वच्छ रखना आवश्यक है।”

शरीर मंदिर है, इसे गंदा मत करो

अपने प्रवचन में प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि मानव शरीर एक मंदिर के समान है, जिसमें परमात्मा स्वयं विराजमान हैं। जब कोई व्यक्ति इस शरीर को गुटखा, शराब या नशे से भर देता है, तो वह अपने ही मंदिर को अपवित्र कर देता है। उन्होंने कहा, “जिस मुख से भगवान का नाम निकलता है, उसी मुख में गुटखा डालना क्या उचित है? यह उसी तरह है जैसे मंदिर में गंदगी डालना।” उन्होंने समझाया कि शुद्ध भक्ति केवल तब संभव है जब इंसान खुद के भीतर अनुशासन और संयम रखे। धर्म का मार्ग केवल मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि आत्मसंयम का मार्ग है।

महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्ति में सबसे पहला नियम ‘संयम’ है। संयम का अर्थ सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक भी होता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने इंद्रियों पर नियंत्रण रखता है, तभी उसे भक्ति का आनंद मिलता है। “गुटखा या तंबाकू जैसी चीजें इंद्रियों को कमजोर करती हैं, जिससे मन अस्थिर हो जाता है और व्यक्ति का ध्यान ईश्वर से हट जाता है,” उन्होंने कहा।

महाराज ने भक्तों को सलाह दी कि अगर वे सच में भगवान से प्रेम करते हैं, तो पहले खुद को शुद्ध करें। गुटखा या तंबाकू छोड़ना केवल स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि के लिए भी जरूरी है।

भक्तों में चर्चा, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

प्रेमानंद महाराज का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, भक्तों के बीच चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने महाराज की बातों से सहमति जताई और इसे आत्ममंथन का संदेश बताया। एक यूजर ने लिखा, “महाराज की बात सच्ची है, हम ईश्वर के नाम का अपमान खुद करते हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह प्रवचन समाज में बढ़ते दिखावे पर एक करारा जवाब है।

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनने के लिए देशभर से लोग आते हैं। वे हमेशा भक्तों को सरल भाषा में आध्यात्मिक ज्ञान देते हैं और जीवन में अनुशासन का महत्व बताते हैं। उनका यह संदेश अब सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुका है और कई लोग इसे जीवन में अपनाने की बात कर रहे हैं।

प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन के अंत में कहा, “भक्ति वही है जो भीतर से निर्मल हो। अगर तुम्हारा मन और मुख दोनों गंदे हैं, तो तुम चाहे कितनी बार भगवान का नाम लो, वो नाम भगवान तक नहीं पहुँचता।” उन्होंने सभी भक्तों से अपील की कि वे अपने जीवन में स्वच्छता, संयम और सादगी को अपनाएं। गुटखा या नशे की लत से मुक्त होकर ही सच्ची भक्ति संभव है।

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