संत समाज और धार्मिक जगत से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बटुकों के यौन शोषण जैसा संगीन आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अब अपने दावों से पूरी तरह पलट गए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए जो कबूलनामा किया है, उसने पूरे देश के आध्यात्मिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज कराया गया पूरा मामला पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत था। उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था, जिसमें वे खुद एक मोहरे की तरह इस्तेमाल हुए। इस यू-टर्न ने न सिर्फ इस हाई-प्रोफाइल मामले को नया मोड़ दे दिया है, बल्कि परदे के पीछे चल रही बड़ी साजिशों की तरफ भी इशारा किया है।
षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार कौन? आशुतोष ने उंगली उठाकर सबको चौंकाया
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने ताजा वीडियो में जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं और सीधे तौर पर तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य रामचंद्र दास की तरफ इशारा करते हैं। आशुतोष का दावा है कि उनके ही गुरुभाई रामचंद्र दास ने ही इस पूरी स्क्रिप्ट को लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि रामचंद्र दास ने न केवल उन पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ फर्जी मुकदमा दायर करने के लिए मानसिक दबाव बनाया, बल्कि उन्हें बुरी तरह गुमराह भी किया। आशुतोष के अनुसार, इस पूरे खेल में केवल रामचंद्र दास ही अकेले नहीं थे, बल्कि शासन-प्रशासन के कई रसूखदार अधिकारी भी इस बड़ी साजिश का हिस्सा थे, जिन्होंने इस फर्जी केस को मजबूत करने में मदद की। इस खुलासे के बाद अब इस मामले में शामिल अन्य चेहरों के बेनकाब होने का डर सताने लगा है।
आश्रम पर कब्जे की जंग और फर्जी वसीयत का काला सच
बात सिर्फ मुकदमों तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे करोड़ों की संपत्ति और मठों पर कब्जे का एक बड़ा खेल चल रहा था। आशुतोष ब्रह्मचारी ने मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक शिकायती पत्र भेजकर इस पूरे मामले की कानूनी जांच की मांग की है। शिकायत में यह सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि रामचंद्र दास की नजर दो बड़े आश्रमों को हथियाने पर थी। इसी इरादे से एक फर्जी वसीयत तैयार की गई और देवा बाबा के पवित्र आश्रम पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया। आशुतोष ने स्पष्ट किया है कि फर्जी वसीयत बनाने और इस जालसाजी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ अब वे सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं, ताकि इस काले साम्राज्य का अंत हो सके।
चैट का वो गुप्त पिटारा, जो खोलेगा कई बड़े राज
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब प्रयागराज माघ मेले के दौरान दोनों पक्षों में ठन गई थी, जिसके बाद पॉक्सो (POCSO) कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन अब पासा पूरी तरह पलट चुका है। आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि उनके पास इस पूरी साजिश का पुख्ता सबूत मौजूद है। उनके पास मोबाइल चैट का वो पूरा रिकॉर्ड है, जिसमें मुकदमा दर्ज कराने से लेकर फर्जी वसीयत तैयार करने तक की हर एक प्लानिंग साफ-साफ दर्ज है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वह बहुत जल्द एक और बड़ा धमाका करेंगे और इस बात का पूरा पर्दाफाश करेंगे कि आखिर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाने के पीछे का असली मकसद और बड़ी ताकतें कौन थीं।
