स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल ही में हुई घटनाओं ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुई कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताई है। यह मामला केवल एक समुद्री घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद का बड़ा विषय बन गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया और पूरी घटना पर स्पष्टीकरण मांगा। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और ऐसी किसी भी कार्रवाई से निर्दोष लोगों की जान नहीं जानी चाहिए। भारतीय नाविकों की मौत ने देश के भीतर भी चिंता बढ़ा दी है और सरकार पर सख्त रुख अपनाने का दबाव दिखाई दिया।
दो बार तलब हुए अमेरिकी राजनयिक
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने एक ही सप्ताह में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को दो बार तलब किया। पहली बार उन्हें उस हमले के बाद बुलाया गया जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। इसके बाद क्षेत्र में मौजूद एक अन्य व्यापारी जहाज, जिसमें करीब 20 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, पर हुई कार्रवाई को लेकर भी भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष के सामने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए जवाबदेही की मांग की। भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर कई देशों के नागरिकों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि नई दिल्ली लगातार इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग कर रही है।
जयशंकर-रुबियो बातचीत में सामने आए तीखे संदेश
घटना के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस बातचीत को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया गया। जयशंकर ने बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से भारत की आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि व्यावसायिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की घातक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लागू सुरक्षा व्यवस्थाओं और निर्देशों का पालन सभी जहाजों को करना चाहिए। अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए उसके कदम जरूरी हैं और किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा ने यह संकेत दिया कि मामला संवेदनशील है और आने वाले दिनों में इस पर और कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
होर्मुज का महत्व और आगे की चुनौती
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, ऐसे घटनाक्रमों पर विशेष नजर रखते हैं। भारतीय सरकार ने साफ कर दिया है कि उसके नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में हर जरूरी कूटनीतिक कदम उठाया जाएगा। वहीं अमेरिका अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर पीछे हटता नहीं दिख रहा है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच संवाद और बढ़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या फिर समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर कोई नया समझौता या रणनीति सामने आएगी। दुनिया की निगाहें अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर केवल भारत और अमेरिका तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।
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