Tuesday, March 3, 2026
HomeदेशReels देखने के लिए नहीं मिला मोबाइल तो 13 साल के मासूम...

Reels देखने के लिए नहीं मिला मोबाइल तो 13 साल के मासूम में उठाया खौफनाक कदम, उजड़ गया परिवार

सोलापुर के पेनूर गांव में मोबाइल छीनने से नाराज 13 साल के बच्चे ने की आत्महत्या। रील देखने की लत ने ली मासूम की जान। क्या डिजिटल एडिक्शन बच्चों के लिए साइलेंट किलर बन रहा है? पूरी रिपोर्ट और माता-पिता के लिए जरूरी चेतावनी।

-

सोशल मीडिया की रंगीन दुनिया और ‘शॉर्ट रील’ का चस्का किस कदर जानलेवा साबित हो सकता है, इसकी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना महाराष्ट्र के सोलापुर से सामने आई है। जिला सोलापुर के मोहोल तालुका के पेनूर गांव में एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां तब मातम में बदल गईं, जब उनके 13 साल के बेटे ने सिर्फ इसलिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली क्योंकि उसे मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से मना किया गया था। यह घटना केवल एक किशोर की आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि आधुनिक दौर के उन माता-पिता के लिए एक खतरे की घंटी है, जिनके बच्चे मोबाइल स्क्रीन में अपनी दुनिया तलाश रहे हैं। महज 13 साल की उम्र, जिसमें बच्चे जीवन के सपने देखते हैं, उस उम्र में यशराज डोके नाम के इस बालक ने मौत का रास्ता चुनकर पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

रील देखने की सनक और वो ‘घातक’ शाम: क्या हुआ था 1 मार्च को?

सोलापुर जिले के मोहोल तालुका के अंतर्गत आने वाले पेनूर गांव के निवासी यशराज धर्मराज डोके को मोबाइल फोन की गहरी लत लग चुकी थी। परिजनों के अनुसार, वह घंटों तक सोशल मीडिया पर रील देखने में व्यस्त रहता था। 1 मार्च की शाम करीब 7 बजे, जब परिवार के सदस्यों ने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने या मोबाइल छोड़ने के लिए कहा, तो घर में मामूली विवाद हुआ। परिजनों ने सख्ती दिखाते हुए उससे मोबाइल फोन ले लिया। यशराज को यह पाबंदी नागवार गुजरी और वह गुस्से में अपने कमरे में चला गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि मोबाइल से दूरी उसे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर देगी। उसने कमरे के अंदर लोहे के एंगल से साड़ी का फंदा बनाया और अपनी जान दे दी। जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में दरवाजा तोड़ा, जहाँ यशराज अचेत अवस्था में मिला।

अस्पताल की दौड़ और पुलिस की कार्रवाई: कानून की नज़र में मामला

कमरे का मंजर देख परिजनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वे आनन-फानन में यशराज को लेकर पहले एक निजी अस्पताल और फिर मोहोल के सरकारी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन मासूम की जान पहले ही जा चुकी थी। डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना मोहोल पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस अधिकारी आबा दत्तात्रेय डोके ने मामले की प्राथमिक जानकारी दर्ज कराई है। पुलिस कांस्टेबल नाले इस मामले की जांच कर रहे हैं और फिलहाल इसे ‘आकस्मिक मृत्यु’ (Accidental Death) के रूप में दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या किशोर किसी और मानसिक तनाव से भी गुजर रहा था या यह केवल तात्कालिक आवेश का परिणाम था।

डिजिटल नशा: क्या हम अपने बच्चों को खो रहे हैं?

यह हृदयविदारक घटना एक बड़े सामाजिक संकट की ओर इशारा करती है—’डिजिटल एडिक्शन’। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि रील और शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग में ‘डोपामाइन’ का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे बच्चों को इसकी लत लग जाती है। जब इस लत को अचानक रोका जाता है, तो बच्चे चिड़चिड़ेपन, अवसाद या अत्यधिक गुस्से का शिकार हो जाते हैं। सोलापुर की यह घटना बताती है कि किशोरों के लिए मोबाइल अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनकी पहचान बन गया है। माता-पिता को यह समझने की जरूरत है कि बच्चों से मोबाइल छीनना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों के प्रति जागरूक करना और उनके साथ भावनात्मक संवाद स्थापित करना अनिवार्य है। अगर बच्चा मोबाइल के लिए हिंसक या बहुत अधिक जिद्दी हो रहा है, तो यह पेशेवर मदद लेने का समय है।

Read More-अंगारों पर चलता रहा शख्स… जलती होलिका में उतर गया भक्त, मथुरा का वीडियो देख दंग रह जाएंगे आप

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts