कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय पर उठे विवाद ने शिक्षा जगत और न्यायिक हलकों में बड़ी बहस छेड़ दी है। मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई, जिसके बाद केंद्र सरकार की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया सामने आई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और अदालत के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जो कुछ हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए खेद व्यक्त किया। मंत्री के बयान ने यह संकेत दिया कि सरकार इस मुद्दे को हल्के में नहीं ले रही है और संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
विवादित अध्याय पर तत्काल रोक
यह विवाद तब सामने आया जब (NCERT) द्वारा जारी नई पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक से प्रकाशित अध्याय के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई गई। आरोप था कि अध्याय में न्यायपालिका और न्याय व्यवस्था को लेकर ऐसी टिप्पणियां शामिल थीं, जिन्हें कई लोगों ने असंतुलित और अनुचित बताया। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किताब के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री ने बताया कि जैसे ही यह विषय उनके संज्ञान में आया, उन्होंने NCERT को संबंधित पुस्तकों को तुरंत वापस लेने और आगे वितरण रोकने का आदेश दिया। उनका कहना है कि न्यायपालिका का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था, लेकिन यदि सामग्री से ऐसी भावना उत्पन्न हुई है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर तय होगी जवाबदेही
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि विवादित सामग्री किताब में कैसे शामिल हुई। उन्होंने कहा कि अध्याय तैयार करने की प्रक्रिया में जो भी लोग शामिल थे, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार का मानना है कि शैक्षणिक सामग्री तैयार करते समय संतुलन, संवेदनशीलता और तथ्यों की शुद्धता बेहद जरूरी है, खासकर तब जब विषय न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था से जुड़ा हो। इस बीच, कई न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अध्याय की भाषा और प्रस्तुति पर आपत्ति जताई थी। मामले ने यह सवाल भी उठाया है कि पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और स्वीकृति प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
NCERT की सफाई और नए सत्र से पहले संशोधित किताब का वादा
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह न्यायपालिका को संविधान और नागरिक अधिकारों का रक्षक मानती है और उसका सम्मान करती है। परिषद के अनुसार, अध्याय में शामिल सामग्री से किसी संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था और यदि अनजाने में कोई त्रुटि हुई है तो उसके लिए खेद है। NCERT ने यह भी बताया कि विवादित अध्याय को दोबारा लिखा जाएगा और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। नई और संशोधित पुस्तक शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने की योजना है। फिलहाल संबंधित पुस्तक की आपूर्ति रोक दी गई है। शिक्षा मंत्रालय और NCERT दोनों ने आश्वासन दिया है कि आगे से पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की जांच अधिक सावधानी से की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संशोधित अध्याय किस रूप में सामने आता है और क्या यह विवाद पूरी तरह शांत हो पाएगा।
