झांसी जिले की गरौठा तहसील में इन दिनों एक नई बनी सड़क चर्चा का विषय बन गई है। बरमाइन से ककरबई के बीच करीब 6 किलोमीटर लंबी सड़क का मरम्मत कार्य लाखों रुपये की लागत से कराया जा रहा है। यह सड़क ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि इससे गांवों के बीच आवागमन आसान होना था और खेती-किसानी से जुड़े कामों को गति मिलनी थी। लेकिन जैसे ही काम आगे बढ़ा, ग्रामीणों को इसकी गुणवत्ता पर शक होने लगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की ऊपरी परत देखने में तो ठीक लग रही थी, लेकिन जब उन्होंने हाथों से दबाकर और खुरचकर देखा तो डामर की परत आसानी से उखड़ने लगी। ग्रामीणों ने मौके पर ही इसका वीडियो बना लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सड़क की परत बिना ज्यादा जोर लगाए उधड़ रही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या सड़क निर्माण में मानकों का पालन किया गया है या फिर जल्दबाजी और लापरवाही में काम किया गया है।
“मिट्टी और गोबर पर डामर” – ग्रामीणों का गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि सड़क की बेस लेयर को ठीक से साफ नहीं किया गया और मिट्टी तथा गोबर जैसी सतह के ऊपर ही डामर बिछा दिया गया। बरमाइन गांव के एक ग्रामीण ने कहा कि उनकी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, न ठेकेदार से और न ही काम देख रहे मेठ से। उनकी नाराजगी सिर्फ इस बात को लेकर है कि सड़क की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर अभी ही सड़क की यह हालत है, तो कुछ महीनों बाद बरसात में इसका क्या हाल होगा। ग्रामीणों ने हाथों से सड़क को उखाड़कर दिखाया और वीडियो में यह भी कहा कि यह सड़क उनके बच्चों, बुजुर्गों और किसानों के रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए है, इसलिए इसका मजबूत और टिकाऊ होना जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। कई लोग इसे सरकारी धन की बर्बादी बता रहे हैं, तो कुछ लोग जिम्मेदार अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद धमकी के आरोप
मामला तब और गंभीर हो गया जब वीडियो बनाने वाले ग्रामीणों ने धमकी मिलने का आरोप लगाया। एक ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के लिए वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था, ताकि उच्च स्तर पर इसकी जांच हो सके। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें चेतावनी दी गई कि रात में उठा लिया जाएगा। ग्रामीणों का दावा है कि धमकी देने वाला व्यक्ति उसी निर्माण कार्य से जुड़ा है।
इन आरोपों के बाद गांव में डर और गुस्से का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर वे अपनी ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठा सकते, तो फिर विकास का क्या मतलब रह जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है और कहा है कि उन्हें सिर्फ निष्पक्ष जांच चाहिए। उनका साफ कहना है कि वे किसी को बदनाम नहीं करना चाहते, बल्कि चाहते हैं कि सड़क सही तरीके से बने ताकि आने वाले कई सालों तक लोगों को परेशानी न हो।
प्रशासन हरकत में, जांच कमेटी गठित
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद गरौठा तहसील प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। गरौठा के एसडीएम सुनील कुमार ने बताया कि यह सड़क लोक निर्माण विभाग यानी Public Works Department द्वारा बनाई जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वीडियो उन्होंने भी देखा है और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जा रही है।
एसडीएम ने कहा कि यदि जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, अगर विभागीय स्तर पर किसी अधिकारी की गलती पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष जांच होगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सच सामने आता है और क्या ग्रामीणों की शिकायत सही साबित होती है। यह मामला न सिर्फ एक सड़क की गुणवत्ता का है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है।

