विदेश दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के साथ एक ऐसे समझौते की दिशा में बड़ा संकेत दिया है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को पूरी तरह बदल सकता है। यह संकेत है भारत-इज़राइल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर तेज़ी से आगे बढ़ती बातचीत का। आधिकारिक बैठकों के बाद यह साफ हुआ कि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। FTA लागू होने पर कई उत्पादों पर लगने वाले आयात-निर्यात शुल्क कम हो सकते हैं या पूरी तरह हटाए जा सकते हैं। इससे भारत के निर्यातकों को इज़राइल के बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, वहीं इज़राइल की टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पाद भारत में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता तय समय पर साइन हो जाता है, तो यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा।
डिजिटल से रक्षा तक: साझेदारी का दायरा बढ़ा
इस दौरे की खास बात यह रही कि बातचीत केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पेमेंट, रक्षा सहयोग, कृषि तकनीक, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की दिशा तय की गई। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को इज़राइल में लागू करने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के कारोबारियों और पर्यटकों को सीधा लाभ मिल सकता है, क्योंकि भुगतान की प्रक्रिया तेज़ और आसान होगी। रक्षा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग को और गहरा करने पर भी जोर दिया गया। ड्रोन तकनीक, आधुनिक हथियार प्रणालियों और साइबर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और उत्पादन की संभावनाएं तलाशने की बात सामने आई है। जानकारों का कहना है कि यह व्यापक सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों को मजबूती देगा।
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा? उद्योग, किसान और स्टार्टअप की उम्मीदें बढ़ीं
FTA लागू होने की स्थिति में भारत के फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, आईटी और कृषि उत्पादों को इज़राइल के बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। वहीं इज़राइल की सिंचाई तकनीक, कृषि अनुसंधान, रक्षा उपकरण और हाई-टेक मशीनरी भारतीय बाजार में अधिक सुलभ हो सकती है। भारत के किसान आधुनिक सिंचाई और जल प्रबंधन तकनीकों से लाभ उठा सकते हैं, जबकि स्टार्टअप सेक्टर को निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग का नया मंच मिलेगा। छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी निर्यात के नए रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार, जो अभी सीमित स्तर पर है, आने वाले वर्षों में दोगुना या उससे अधिक हो सकता है। इससे रोजगार सृजन और निवेश प्रवाह में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
रणनीतिक संकेत और आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी और इज़राइल के नेतृत्व के बीच हुई बैठकों को केवल एक औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की लंबी रणनीतिक साझेदारी की नींव के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि वे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। आने वाले महीनों में FTA वार्ता के अगले दौर की तारीखें तय की जा सकती हैं और ड्राफ्ट समझौते पर काम तेज़ हो सकता है। अगर सभी बिंदुओं पर सहमति बनती है, तो यह समझौता न केवल व्यापार बल्कि तकनीकी, रक्षा और डिजिटल सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि यह ऐतिहासिक डील कब औपचारिक रूप लेगी और दोनों देशों के कारोबारी समुदाय को इसका वास्तविक लाभ कब से मिलना शुरू होगा।
