नैनीताल की व्यस्त माल रोड पर गुरुवार को लंबा जाम लगा हुआ था। इस दौरान एक Rajendra Patel के पुत्र की फॉर्च्यूनर गाड़ी लगातार हूटर बजा रही थी। वाहन आगे चल रहे एसडीएम नवाजिश खलीक ने पहले किसी वीआईपी के आने की संभावना को देखते हुए गाड़ी को साइड करने की सुविधा दी। लेकिन जब हूटर लगातार बजता रहा और ट्रैफिक बाधित हुआ, तो एसडीएम ने गाड़ी को रुकवाया और चालक से स्थिति पर आपत्ति जताई। इस दौरान विधायक पुत्र गाड़ी में ही मौजूद थे और उन्होंने राजनीतिक पहुंच का हवाला देते हुए अभद्रता पर उतर आए।
विधायक पुत्र और एसडीएम के बीच तीखी बहस
एसडीएम और विधायक पुत्र के बीच जमकर बहस हुई। एसडीएम ने कहा कि जाम में यह वीआईपी कल्चर ठीक नहीं है और सभी वाहन नियमों के अनुसार चलाने चाहिए। इसके बावजूद विधायक पुत्र ने गाड़ी में बैठकर विवाद बढ़ाया। आसपास मौजूद नागरिक और दुकानदार भी इस घटना को देख सकते थे। सड़क जाम बढ़ते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने न सिर्फ स्थिति को संभाला बल्कि वाहन के कागजात और चालक की जांच भी शुरू कर दी।
वाहन के दस्तावेजों में भी भारी गड़बड़ी
पुलिस द्वारा वाहन के दस्तावेजों की जांच के दौरान कई खामियां सामने आई। वाहन का बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने के साथ ही चालक के पास लाइसेंस भी मौजूद नहीं था। इसके अलावा गाड़ी का रजिस्ट्रेशन विधायक के नाम के बजाय सुरेंद्र कुमार सिंह के नाम पर मिला। इस सबके आधार पर पुलिस ने वाहन को तत्काल सीज कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने इसे कानूनी कार्रवाई के लिए रिकार्ड में दर्ज करवाया।
राजनीतिक पहचान और वीआईपी कल्चर पर सवाल
इस पूरे मामले ने नैनीताल में वीआईपी कल्चर और राजनीतिक पहचान के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता और ट्रैफिक अधिकारियों के बीच हुए इस टकराव ने यह साफ किया कि नियम सभी के लिए बराबर हैं, चाहे कोई विधायक का पुत्र ही क्यों न हो। एसडीएम नवाजिश खलीक की सजगता और कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि किसी भी सरकारी अधिकारी के सामने नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए मॉनिटरिंग बढ़ाने का ऐलान किया है।
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