Thursday, February 12, 2026
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PSLV-C62 मिशन में क्या गड़बड़ हो गई? तय रास्ते से भटका रॉकेट, ISRO ने दी पहली प्रतिक्रिया

PSLV-C62 मिशन में तकनीकी गड़बड़ी, तय रास्ते से भटका ISRO का रॉकेट। जानिए क्या हुआ लॉन्च के दौरान, ISRO ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा और आगे की पूरी रणनीति।

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12 जनवरी 2026 की सुबह भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक बेहद अहम दिन माना जा रहा था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने साल के पहले मिशन के तौर पर PSLV-C62 रॉकेट को लॉन्च किया। यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। शुरुआती कुछ मिनटों तक सब कुछ सामान्य रहा और रॉकेट ने धरती से सफलतापूर्वक उड़ान भरी। लेकिन कुछ ही देर बाद मिशन कंट्रोल को रॉकेट के निर्धारित मार्ग से हटने के संकेत मिलने लगे।

ISRO के वैज्ञानिकों ने देखा कि PSLV-C62 अपने तय प्रक्षेप पथ से धीरे-धीरे विचलित हो रहा है। यह स्थिति सामान्य नहीं थी और तुरंत कंट्रोल रूम में अलर्ट जारी कर दिया गया। हालांकि इस दौरान रॉकेट से संपर्क बना रहा, लेकिन मिशन के तय उद्देश्यों पर असर पड़ने की आशंका गहराने लगी।

ISRO की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया?

घटना के कुछ समय बाद ISRO ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति की जानकारी साझा की। संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि PSLV-C62 मिशन के दौरान एक तकनीकी अनियमितता सामने आई है, जिसके कारण रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया। ISRO ने साफ किया कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और पूरी घटना का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
ISRO अधिकारियों ने कहा कि रॉकेट के सभी सिस्टम्स से जुड़े डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है और हर सेकंड की जानकारी का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि PSLV एक भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल रहा है और इससे पहले कई सफल मिशन पूरे कर चुका है। इस घटना को संगठन सीख के रूप में लेकर भविष्य के मिशनों को और मजबूत बनाने पर काम करेगा।

PSLV-C62 मिशन क्यों था खास?

PSLV-C62 मिशन ISRO के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण था। यह साल 2026 का पहला लॉन्च मिशन था और इसके जरिए महत्वपूर्ण उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने की योजना थी। PSLV यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल को भारत की सबसे विश्वसनीय रॉकेट प्रणाली माना जाता है, जिसने अब तक देश और विदेश के सैकड़ों उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है।

इस मिशन से जुड़े उपग्रह का इस्तेमाल वैज्ञानिक शोध, संचार या पृथ्वी अवलोकन जैसे अहम कार्यों के लिए किया जाना था। ऐसे में मिशन के रास्ते से भटकने की खबर ने वैज्ञानिक समुदाय के साथ-साथ आम लोगों को भी चिंता में डाल दिया। हालांकि ISRO का रिकॉर्ड यह बताता है कि संगठन हर चुनौती से सीख लेकर और मजबूती के साथ आगे बढ़ता है।

अब आगे क्या? ISRO की रणनीति और देश की उम्मीदें

PSLV-C62 मिशन में आई इस तकनीकी चुनौती के बाद अब सभी की नजरें ISRO की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। संगठन ने भरोसा दिलाया है कि विशेषज्ञों की एक टीम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। इसमें रॉकेट के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, सेंसर डेटा और उड़ान के दौरान मिले संकेतों का विश्लेषण किया जाएगा।

ISRO ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद पूरी पारदर्शिता के साथ देश को जानकारी दी जाएगी। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और इस तरह की घटनाएं किसी भी बड़े वैज्ञानिक मिशन का हिस्सा होती हैं। देश को अपने वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा है कि वे इस चुनौती को भी अवसर में बदलेंगे और आने वाले मिशन पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।

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