India ने 6.ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन पर औपचारिक रूप से शोक व्यक्त किया। 5 मार्च को विदेश सचिव Vikram Misri नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि अर्पित की। खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मौत हुई थी। वे 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की राजनीति व धार्मिक व्यवस्था में उनका अहम स्थान था। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक व व्यापारिक संबंध रहे हैं, इसलिए भारत का यह कदम औपचारिक और कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय की ओर से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कांग्रेस का पलटवार, डिप्लोमेसी पर सवाल
भारत सरकार की ओर से शोक जताने के बाद Indian National Congress ने इस पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता शुभंकर सरकार ने कहा कि सरकार की कूटनीति कमजोर रही है और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख समय पर सामने नहीं आया। उनका आरोप है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हुई तब सरकार ने शोक जताने का कदम उठाया। कांग्रेस का कहना है कि विदेश नीति में संतुलन और स्पष्टता जरूरी होती है। हालांकि सरकार की ओर से इस बयान पर सीधा जवाब नहीं दिया गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत का रुख हमेशा संतुलित और परंपरागत कूटनीतिक प्रक्रिया के अनुरूप रहता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विदेश नीति एक बार फिर घरेलू राजनीति का विषय बन गई है।
कैसे हुई खामेनेई की मौत, क्या था ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’
रिपोर्टों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में खामेनेई की मौत हुई। इस अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सबसे पहले इसकी जानकारी दी, जिसके बाद ईरान की सरकारी मीडिया ने भी पुष्टि की। इस घटना के बाद ईरान में 40 दिन के शोक की घोषणा की गई। कई देशों ने इस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया। पश्चिम एशिया पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति में है, ऐसे में इस घटना ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
अंतिम संस्कार टला, तेहरान में तैयारियां जारी
खामेनेई को अब तक सुपुर्द-ए-खाक नहीं किया गया है। आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन कार्यक्रम को ऐन वक्त पर टाल दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में रखने की तैयारी की जा रही है, जो बड़े धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजनों के लिए प्रसिद्ध स्थल है। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। खामेनेई ईरान की राजनीति और धर्म दोनों में प्रभावशाली चेहरा थे, इसलिए उनके निधन के बाद देश के भीतर भी नेतृत्व और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारत समेत कई देश स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।
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