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“वह हमारे लिए मां जैसी थी…” 24 साल बाद गाय गोरी ने छोड़ी दुनिया, इंसानों जैसी अंतिम यात्रा

बागपत की गाय गोरी का 24 साल बाद निधन, इंसानों जैसी अंतिम यात्रा और भावनात्मक विदाई। जानिए क्यों इसे लोग ‘मां जैसी’ मानते थे।

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बागपत में पाली गई गाय गोरी, जिसने 24 साल तक अपने मालिकों के साथ खास रिश्ता निभाया, का निधन हो गया। गोरियों को केवल एक जानवर के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह देखा जाता था। उनके मालिक और आसपास के लोग उन्हें “मां” कहकर पुकारते थे। अंतिम संस्कार के समय इंसानों की तरह सभी भावनाओं के साथ उन्हें विदा किया गया, जिससे आसपास मौजूद लोग भावुक हो गए।

इंसानों जैसी अंतिम यात्रा

गोरी की अंतिम यात्रा में जो दृश्य देखने को मिला, वह किसी इंसानी अंतिम संस्कार जैसा था। परिवार और स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे। बच्चे और बुजुर्ग सब रो रहे थे। गोरियों के प्रति यह सम्मान और संवेदना दर्शाता है कि यह गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक माँ जैसी थी।

गांव में गोरी की खास जगह

गोरी का जीवन गांव और मोहल्ले में कई लोगों के लिए प्रेरणा रहा। उन्होंने कई लोगों के घरों में दूध और दया का योगदान दिया। उनकी मृत्यु से गांव और आसपास के लोग शोक में हैं। मालिकों का कहना है कि गोरियों के जाने से उनका परिवार अधूरा सा लग रहा है। यह घटना यह दिखाती है कि जानवर और इंसान के बीच भी गहरा भावनात्मक बंधन हो सकता है।

सोशल मीडिया और स्थानीय प्रतिक्रियाएँ

गोरी की विदाई की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। लोग कमेंट कर रहे हैं कि “ऐसे जानवर ही असली परिवार के सदस्य होते हैं।” कई लोग भावुक होकर लिख रहे हैं कि गोरी ने उन्हें भी प्यार और स्नेह देना सिखाया। यह घटना बागपत और आसपास के लोगों के दिलों में लंबे समय तक याद रहेगी।

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