राजस्थान के एक गांव में उस समय हर कोई हैरान रह गया, जब दूल्हे महेंद्र डोडवाडिया की बारात घोड़े या महंगी गाड़ियों पर नहीं, बल्कि 101 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ निकली। यह दृश्य इतना अनोखा और आकर्षक था कि रास्ते भर लोग इसे देखने के लिए रुकते चले गए। बारात लगभग 11 किलोमीटर दूर दुल्हन सुमन के गांव भैरूपुरा पहुंची। सजे-धजे ट्रैक्टरों की लंबी कतार किसी त्योहार से कम नहीं लग रही थी। महेंद्र खुद सबसे आगे एक खूबसूरती से सजाए गए ट्रैक्टर पर सवार होकर बारात की अगुवाई कर रहे थे। पहली बार इतनी बड़ी ट्रैक्टर-बारात देखकर ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के गांवों से आए लोगों में भी खूब उत्साह देखा गया।
ट्रैक्टर क्यों चुना? दूल्हे ने बताई वजह
दूल्हे महेंद्र डोडवाडिया ने इस अनोखी बारात के पीछे की सोच बताते हुए कहा, “मैं किसान परिवार से हूं और हमारे लिए ट्रैक्टर सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि किसान की असली पहचान है। जैसे शहरों में लोग महंगी गाड़ियों को स्टेटस मानते हैं, वैसे ही किसान के लिए ट्रैक्टर गर्व की बात है।” महेंद्र ने आगे बताया कि वह अपनी शादी को किसी अलग और यादगार अंदाज में मनाना चाहते थे। उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा तरीका अपनाया जाए, जिससे किसान भाइयों की मेहनत और पहचान भी लोगों के सामने आए। इसी सोच के चलते उन्होंने बारात को ट्रैक्टरों पर निकालने का फैसला लिया। उनके अनुसार, यह उनके किसान साथियों के लिए सम्मान का अवसर भी था।
दूल्हे के पिता की भावनात्मक सोच
महेंद्र के पिता दयालराम डोडवाडिया ने भी इस अनोखी बारात के पीछे की वजह बताई। उन्होंने कहा, “हम खेती-किसानी का काम करते हैं और धरती पुत्र किसानों की पहचान ट्रैक्टर है। मैं हमेशा चाहता था कि बेटे की बारात में किसान भाइयों को उनके ट्रैक्टरों के साथ शामिल किया जाए। इसलिए कई दिनों पहले ही हमने तय कर लिया था कि बारात ट्रैक्टरों पर ही निकलेगी।” दयालराम ने बताया कि जब उन्होंने यह विचार गांव के अन्य किसानों के साथ साझा किया, तो सभी अत्यंत उत्साहित हुए और खुशी-खुशी अपने ट्रैक्टरों को सजाकर बारात में शामिल होने का वादा किया। जब शादी का दिन आया, तो पूरा गांव एक बड़े जश्न की तरह इस आयोजन में शामिल हो गया।
गांव में खुशी का माहौल
जब 101 ट्रैक्टरों की बारात दुल्हन के घर पहुंची, तो वहां मौजूद लोग इस अनोखे नजारे को कैमरे में कैद करने के लिए उमड़ पड़े। कोई सेल्फी ले रहा था, कोई वीडियो बना रहा था। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी बारात पहली बार देखी। वहीं बच्चों और युवाओं में इस बारात को लेकर खास उत्साह था। सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है और लोग इसे किसान समुदाय की एक शानदार पहल बता रहे हैं। कई लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि यह बारात सिर्फ शादी नहीं, बल्कि किसान गौरव का उत्सव भी थी। इस अनोखी पहल ने न सिर्फ गांव बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। महेंद्र और उनके परिवार का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा कि अपनी जड़ों और अपनी पहचान को लेकर गर्व करना चाहिए।
