महाराष्ट्र के बदलापुर से सामने आया स्त्री बीज (ओवम) की अवैध खरीद-फरोख्त का मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। जांच में सामने आया है कि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को 18 से 25 हजार रुपये का लालच देकर उनके शरीर से 10 से 12 बार तक स्त्री बीज निकाले गए। मेडिकल नियमों के मुताबिक ऐसा करना पूरी तरह गैरकानूनी और जानलेवा जोखिम से भरा होता है।
इस रैकेट में महिलाओं को पहले इंजेक्शन और हार्मोनल दवाओं के जरिए ओवम बढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग शहरों और राज्यों में भेजकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि असली पहचान छिपाई जा सके। पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था, जिससे लंबे समय तक किसी को शक नहीं हुआ।
सोनोग्राफी से लेकर IVF तक पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस अवैध धंधे में सोनोग्राफी सेंटर और आईवीएफ (IVF) सेंटर की अहम भूमिका थी। सोनोग्राफी के जरिए यह पुष्टि की जाती थी कि महिला में स्त्री बीज तैयार हुआ है या नहीं। इसके बाद संबंधित महिला को आईवीएफ सेंटर में ले जाकर ऑपरेशन थिएटर में ओवम निकाला जाता था और उसकी अवैध बिक्री की जाती थी।
इस रैकेट का मुख्य केंद्र नासिक बताया जा रहा है, जहां कुछ आईवीएफ सेंटरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। उल्हासनगर के एक सोनोग्राफी सेंटर में काम करने वाली महिला की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ स्थानीय रैकेट नहीं, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।
छापेमारी से खुला राज़
इस खतरनाक रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब बदलापुर उप-जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्योत्स्ना सावंत की टीम ने सुलक्षणा गाडेकर के घर पर छापा मारा। यहां से भारी मात्रा में स्त्री बीज बढ़ाने वाले इंजेक्शन, हार्मोनल दवाएं और मेडिकल उपकरण बरामद किए गए, जो बिना किसी वैध अनुमति के रखे गए थे।
आरोप है कि सुलक्षणा गाडेकर जरूरतमंद महिलाओं को अपने जाल में फंसाती थी और उन्हें पैसों का लालच देकर बार-बार मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने को मजबूर करती थी। इस मामले में अश्विनी चाबुकस्वार और मंजुषा वानखड़े समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि महिलाओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया गया, बल्कि उन्हें सिर्फ “कमाई का जरिया” समझा गया।
महिला आयोग सख्त, आगे और खुलासों की उम्मीद
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने इस मामले को महिलाओं के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस रैकेट में शामिल सभी आईवीएफ और सोनोग्राफी सेंटरों पर सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।
उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और झूठी पहचान के जरिए इस अवैध कारोबार को लंबे समय तक चलाया। फिलहाल बदलापुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे यह साफ हो जाएगा कि यह रैकेट कितनी गहराई तक फैला हुआ था।
