Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना घटी है, जिसने हर सुनने वाले की रूह कंपा दी है। जुलाहा टोली वार्ड संख्या-12 में रात के करीब 1:30 बजे सन्नाटे को चीरती हुई खुशबू खातून की चीखें सुनकर आसपास के लोग दहल गए। स्थानीय लोगों ने जब स्थिति को भांप लिया, तो तुरंत डायल 112 को सूचना दी। जब पुलिस और लोग मौके पर पहुंचे, तो नजारा भयावह था। खुशबू को उसके ही ससुराल वालों ने कथित तौर पर पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया था। लगभग 90 प्रतिशत तक झुलस चुकी खुशबू को तत्काल रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए GMCH बेतिया रेफर कर दिया गया। लेकिन अफसोस, इलाज के दौरान खुशबू ने दम तोड़ दिया, और अपने पीछे छोड़ गई दहेज के लोभियों की हैवानियत के निशान।
मौत से पहले फोन पर मांगी थी जिंदगी की भीख
इस हत्याकांड का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू वह आखिरी कॉल है, जो खुशबू ने मरने से ठीक पहले अपने मायके वालों को की थी। खुशबू के भाई सद्दाम के अनुसार, उसकी बहन को अहसास हो गया था कि उसके साथ कुछ बुरा होने वाला है। उसने फोन पर रोते हुए अपने पिता से बार-बार कहा था, “पापा बचा लो, ये लोग मुझे जान से मार देंगे।” वह आखिरी बार अपने पिता की मदद की उम्मीद में चिल्लाती रही, लेकिन कसाई बन चुके ससुराल वालों ने उसे संभलने का मौका तक नहीं दिया। फोन कटने के कुछ ही देर बाद उस पर पेट्रोल डाल दिया गया। एक पिता के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी कि उसकी बेटी उसे बचाने के लिए पुकारती रही और वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया। आज खुशबू की वह अंतिम पुकार पूरे परिवार के कानों में गूंज रही है।
संतान न होने का ताना और ‘टाटा पंच’ की खूनी मांग
मृतका के परिजनों ने जो खुलासे किए हैं, वे दहेज प्रथा के घिनौने चेहरे को उजागर करते हैं। खुशबू की शादी औरंगजेब से दो साल पहले हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही संतान न होने को लेकर खुशबू को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। ससुराल वाले उसे साथ रखने की शर्त के रूप में ‘टाटा पंच’ कार की मांग कर रहे थे। इस प्रताड़ना से तंग आकर खुशबू ने पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और कुछ समय मायके में भी रही थी। लेकिन किसे पता था कि समझौता करके ससुराल लौटना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होगी। एक तरफ आधुनिकता की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक कार और संतान न होने जैसी बातों पर एक विवाहिता को जिंदा जला देना समाज की सड़ी-गली मानसिकता को दर्शाता है।
पुलिस की कार्रवाई और इंसाफ की पुकार
घटना के बाद से ही रामनगर इलाके में भारी तनाव और आक्रोश देखा जा रहा है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की रफ्तार तेज कर दी है। बगहा की प्रभारी एसपी निर्मला कुमारी ने बताया कि घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया है और साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल (FSL) की टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही वे सलाखों के पीछे होंगे। हालांकि, खुशबू के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है; उनकी मांग सिर्फ एक है—”कठोरतम सजा”। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में दहेज विरोधी कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक कार की कीमत एक बेटी की जान से ज्यादा हो गई है? पूरा चंपारण अब खुशबू के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है।
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