महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया। आंचल नाम की लड़की ने अपने प्रेमी सक्षम की मौत के बाद वह फैसला लिया, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। सक्षम की हत्या के बाद जब उसका शव घर पहुंचा, तो आंचल ने रोते हुए उसके साथ सात फेरे लिए और सबके सामने कहा— “मैं विधवा नहीं, सक्षम की दुल्हन हूं। मौत भी हमें अलग नहीं कर सकती।”
तीन साल से एक-दूसरे से प्रेम कर रहे सक्षम और आंचल अपने भविष्य के सपने बुन रहे थे, लेकिन जाति के नाम पर ऐसी दीवार खड़ी कर दी गई जिसने एक जिंदगी छीन ली और दूसरी को खामोश दर्द में धकेल दिया।
हत्या की वह खौफनाक रात जिसने जिंदगी बदल दी
आंचल ने बताया कि 27 नवंबर की रात उसका छोटा भाई हीमेश उसे पुलिस स्टेशन ले गया, जहां वह उससे सक्षम के खिलाफ केस दर्ज करवाने का दबाव डाल रहा था। आंचल ने इंकार किया तो भाई और भी गुस्से में आ गया। लड़की का आरोप है कि वहां मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने भी भड़काऊ बातें कही, जिसने उसके भाई को उकसा दिया।
घर लौटने के बाद रात में ही पिता और भाई ने सक्षम को उठाया, पीटा और फिर सिर में गोली मार दी। इतना ही नहीं, उसके सिर को पत्थर से कुचल दिया गया। वारदात की हालत देखकर पुलिस भी स्तब्ध रह गई। आंचल ने बताया कि उसे किसी ने नहीं बताया कि सक्षम को मार दिया गया, जब तक कि लाश घर नहीं पहुंची। शव देखते ही उसकी दुनिया उजड़ गई। वह वहीं टूट गई, लेकिन अपने प्यार को ‘अधूरा’ नहीं छोड़ना चाहती थी।
शव के साथ शादी—प्यार की अंतिम मंज़िल
सक्षम की लाश के सामने खड़ी आंचल ने अपना सिंदूर उठाया और परिवार की परंपराओं को छोड़ते हुए सक्षम के शव के साथ फेरे लिए। वहां मौजूद लोगों ने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा था। आंचल लगातार यही कह रही थी,”मैं विधवा कैसे हो गई? मैं तो उसकी दुल्हन हूं। हम दोनों ने साथ जीने-मरने की कसम खाई थी।”
पुलिस इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर चुकी है और जांच जारी है। आंचल की मांग है कि जिन लोगों ने सक्षम की जान ली है, उन्हें वैसी ही सजा मिले जैसी उन्होंने उसके प्रेमी को दी। लड़की का कहना है कि जाति के नाम पर किए गए ऐसे अपराधों को कठोर सजा ही रोक सकती है।
अब सक्षम के घर की ‘बेटा’ बनकर जीने का वचन
सक्षम के जाने के बाद भी आंचल ने उसके परिवार का साथ नहीं छोड़ा है। लड़की ने साफ कहा,”मैं अब सक्षम के मम्मी-पापा के साथ रहूंगी। उनके बेटे की जगह मैं उनका सहारा बनूंगी। सक्षम के जो भी सपने थे, उन्हें मैं पूरा करूंगी।”
सक्षम के माता-पिता ने भी आंचल को अपनाया है और बेटी की तरह घर में रखा है। आंचल का मानना है कि समाज चाहे जो कहे, वह हमेशा सक्षम की पत्नी ही रहेगी, क्योंकि प्यार मौत के बाद भी खत्म नहीं होता। उसकी नजर में यह सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि प्यार के खिलाफ सोच की हार है।
इस घटना ने नांदेड़ ही नहीं, पूरे देश में समाजिक सोच, जाति आधारित हिंसा और सम्मान के नाम पर की जाने वाली हत्याओं को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
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