पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में लंबे समय से खिंचाव रहा है, लेकिन इस बार हालात कुछ ज्यादा ही गंभीर नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हालिया बयान में कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए “खुले विकल्प” अपनाएगा और जरूरत पड़ी तो खुली जंग से भी पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद सीमा पर सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने अफगान सीमा से लगे इलाकों में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किए। वहीं अफगान तालिबान प्रशासन ने इन कार्रवाइयों को सीधा हमला करार दिया और जवाब देने की बात कही। रातभर गोलाबारी और विस्फोटों की खबरें आती रहीं, जिससे सीमा से सटे गांवों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनी और कई जगह तेज धमाके महसूस किए।
काबुल और कंधार में हमलों के दावे, दोनों तरफ से सख्त रुख
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार के आसपास संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ऐसे समूह कर रहे थे जो उसकी जमीन पर हमलों की योजना बना रहे थे। दूसरी ओर अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन किया है और आम इलाकों को खतरे में डाला है। तालिबान प्रशासन ने यह भी दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में कुछ पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावे और प्रतिदावे स्थिति को और उलझा सकते हैं। अगर बातचीत का रास्ता नहीं निकला, तो यह टकराव लंबा खिंच सकता है।
डूरंड लाइन पर आम लोगों की बढ़ती परेशानी
अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करने वाली डूरंड लाइन के आसपास बसे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सीमा पर रहने वाले परिवारों का कहना है कि वे लगातार डर के साये में जी रहे हैं। कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बाजारों में सन्नाटा पसरा है। कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और सतर्क रहने की अपील की है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि सीमा क्षेत्र पहले भी संवेदनशील रहा है, लेकिन इस बार बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों का स्तर ज्यादा है। यदि स्थिति नहीं संभली तो मानवीय संकट की आशंका भी बढ़ सकती है। खासकर सर्द मौसम और सीमित संसाधनों के बीच लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
क्या कूटनीति से निकलेगा हल या बढ़ेगा संघर्ष?
‘ओपन वॉर’ जैसे शब्द हालात को और भड़का सकते हैं। दोनों देशों के बीच पहले भी तनाव रहा है, लेकिन आमतौर पर कूटनीतिक बातचीत से स्थिति संभाली जाती रही है। इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हैं। कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत से समाधान निकालने की अपील की है। अगर सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ा, तो यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सीमित दबाव की रणनीति है या वाकई बड़े युद्ध की शुरुआत। आने वाले दिनों में दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और जमीनी हालात इस सस्पेंस को साफ करेंगे। तब तक सीमा पर तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है।

