दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले के बाद 165 बच्चियों की मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार हमले में जान गंवाने वाली सभी बच्चियों को एक साथ दफनाया गया। कब्रिस्तान में कतारबद्ध कब्रें तैयार की गईं, जहां परिजनों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने लोगों को भावुक कर दिया है।
मैरी एल ट्रम्प की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भतीजी मैरी एल ट्रम्प ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कब्रों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि इस तरह की घटना को सही ठहराना मुश्किल है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि कुछ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की। मैरी एल ट्रम्प पहले भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं।
ईरान के विदेश मंत्री का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि स्कूल में मारी गई बच्चियों की कब्रें इस घटना की गंभीरता को दिखाती हैं। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हमले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है।
जंग के बीच नागरिकों की सुरक्षा पर बहस
मिनाब की घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि संघर्ष के दौरान आम नागरिकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी युद्ध या सैन्य कार्रवाई में नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन राहत और सहायता कार्यों में जुटा है, जबकि परिजन अपने बच्चों की याद में शोक मना रहे हैं।
