रायपुर में खेला गया दूसरा वनडे भारतीय टीम और केएल राहुल के लिए उम्मीदों और निराशा दोनों का मिश्रण बनकर सामने आया। भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 358 रन जैसा मजबूत स्कोर खड़ा किया था। यह स्कोर किसी भी टीम के लिए दबाव वाला माना जाता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने इसका पीछा करने में असाधारण आत्मविश्वास दिखाया। भारतीय बल्लेबाज़ों ने शानदार शुरुआत की, पारी के बीच में गति बनाए रखी और अंत में तेजी भी दिखाई, जिससे एक समय लगा कि भारत श्रृंखला को आसानी से अपने नाम कर लेगा।
लेकिन जब लक्ष्य का पीछा करने मैदान पर उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम, तो उनका अंदाज़ कुछ और ही दिखाई दिया। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और भारतीय गेंदबाज़ों को चुनौती दी। भारतीय फैंस यह देखकर सकते में आ गए कि जो मुकाबला भारत के पक्ष में माना जा रहा था, वह धीरे-धीरे हाथ से निकलने लगा। पूरे मैच में भारतीय गेंदबाज़ों की अलग-अलग योजनाएँ आजमाई गईं, लेकिन विपक्षी बल्लेबाज़ों ने समझदारी से हर चुनौती का जवाब दिया और अंत में जीत के साथ मैच को अपनी मुट्ठी में कर लिया।
गेंदबाज़ी और फील्डिंग में चूक बनी सबसे बड़ी समस्या
भारतीय कप्तान केएल राहुल ने मैच के बाद स्पष्ट रूप से माना कि टीम गेंदबाज़ी और फील्डिंग दोनों ही विभागों में कमजोर दिखाई दी। उन्होंने कहा कि जब टीम 350 के आसपास या उससे अधिक स्कोर करती है, तो गेंदबाज़ों से उम्मीद होती है कि वे विपक्षी बल्लेबाज़ों को शुरुआती झटके दें। लेकिन रायपुर में ऐसा नहीं हो पाया। शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाज़ी में वह धार नजर नहीं आई जिसकी जरूरत होती है।
राहुल ने फील्डिंग की गलतियों का भी खास तौर पर ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि कई मौकों पर फील्डर्स ने आसान कैच छोड़ दिए या गलत थ्रो कर दिए, जिससे विपक्षी बल्लेबाज़ों को अतिरिक्त रन मिले। कुछ मौकों पर बाउंड्री रोकने के लिए किया गया प्रयास भी कमजोर दिखा। बल्लेबाज़ों के शानदार प्रदर्शन के बाद सामान्यतः टीम का आत्मविश्वास बढ़ता है, लेकिन गेंदबाज़ और फील्डर अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे सके, जिसके कारण मैच विरोधी टीम की ओर झुकता चला गया।
कप्तान राहुल का दर्द—कहां गलत हुई टीम इंडिया?
केएल राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टीम इंडिया जीत के बहुत करीब थी, लेकिन कुछ छोटी-छोटी गलतियों ने पूरे मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने माना कि 350 से अधिक का स्कोर आमतौर पर जीत सुनिश्चित कर देता है, लेकिन गेंदबाज़ी के विकल्पों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया।
राहुल ने यह भी स्वीकार किया कि पारी के बीच और डेथ ओवरों में गेंदबाज़ी पर नियंत्रण रखना चाहिए था। उन्होंने बताया कि टीम ने कुछ ओवर ऐसे दिए जिनमें लगातार बाउंड्री मिलती रही और वहां से मैच तेजी से विपक्ष की तरफ चला गया। पिच पर ओस गिरने के कारण गेंद फिसल रही थी, जिसका फायदा दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज़ों ने उठाया। कप्तान ने कहा कि टीम को यह अंदाज़ा था कि ओस मैच को प्रभावित कर सकती है, लेकिन उसी हिसाब से रणनीति को उतनी सटीकता से लागू नहीं किया गया। राहुल की आवाज़ में निराशा साफ सुनाई दी, क्योंकि यह मैच भारत की पकड़ में दिख रहा था। उन्होंने कहा कि एक कप्तान के रूप में ऐसी हार को पचाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब आपकी टीम इतना बड़ा स्कोर बनाती है। लेकिन उन्होंने साथ ही भरोसा जताया कि टीम इन गलतियों से सीखकर आखिरी वनडे में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
निर्णायक मुकाबला अब विशाखापत्तनम में—दोनों टीमों में बढ़ी टक्कर
इस हार के साथ श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर आ गई है, और अब आखिरी वनडे ही विजेता तय करेगा। विशाखापत्तनम में होने वाला अंतिम मैच दोनों टीमों के लिए फाइनल जैसा बन गया है। भारतीय टीम के लिए यह मौका है कि वे अपनी कमजोरियों को सुधारें और बल्लेबाज़ी के साथ गेंदबाज़ी व फील्डिंग में भी संयम दिखाएं।
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